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गहरी सांस लेने पर ये बड़े बदलाव होते हैं मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में
डीप बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग से मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में 175 नà¥à¤¯à¥‚रॉनà¥à¤¸ à¤à¤• साथ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं
बà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¿à¤‚ग यानी सांस लेने के तरीके में किसी à¤à¥€ तरह का बदलाव मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में à¤à¥€ बदलाव लाता है. अमेरिका के नॉरà¥à¤¥ शोर यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में डॉकà¥à¤Ÿà¤° जोश हेरैरो और डॉ आशीष मेहता ने सांस लेने के तरीके और बà¥à¤°à¥‡à¤¨ पर शोध किया. इस शोध की खास बात ये थी कि इस दौरान मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• का à¤à¥€à¤¤à¤° से अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया जा सका. इससे पहले जितने à¤à¥€ शोध थे, वे सारे इमेजिंग तकनीक पर आधारित थे.
इसके तहत सबसे पहले मरीजों को देखा गया, जब वे सामानà¥à¤¯ अवसà¥à¤¥à¤¾ में थे और अपने पेस पर सांस ले रहे थे. इस दौरान मशीनों के जरिठउनके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में बदलाव को देखा गया. बाद में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलग-अलग टासà¥à¤• दिठगà¤. जैसे कि मरीजों को कंपà¥à¤¯à¥‚टर सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ को देखना था और जैसे ही सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ पर सरà¥à¤•ल उà¤à¤°à¥‡, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• बटन कà¥à¤²à¤¿à¤• करना था. इस à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ में मरीजों को अपनी सांस पर फोकस नहीं करना था लेकिन तब à¤à¥€ किसी à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ में लगा होने की वजह से उनकी सांस की गति बदल रही थी.
इससे मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में 175 नà¥à¤¯à¥‚रॉनà¥à¤¸ à¤à¤• साथ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ करते हैं
तीसरी à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ के तहत मरीजों को तेजी से सांस लेनी थी और उसे गिनना था. इस दौरान मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में बड़ी तेजी से बदलाव आया. ऑटोमेटिक और इंटेशनल तरीके से सांस लेने के दौरान मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के अलग-अलग हिसà¥à¤¸à¥‡ में अलग-अलग तरह के बदलाव देखे गà¤.
ये पाया गया कि किसी à¤à¥€ तरह के तनाव में अगर तेजी से सांस ली जाती है तो मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में à¤à¤• तरह का हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ निकलता है जो à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾ बढ़ाने में मदद करता है. खासकर à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¶à¤¨ में, जहां शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह का सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ होता है, वहां हर आधे घंटे में रà¥à¤•कर 5 मिनट के लिठगहरी सांस लेना तनाव काफी मददगार होता है.
इससे पहले जो à¤à¥€ नà¥à¤¯à¥‚रोसाइंस सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ हà¥à¤ˆ हैं, उनमें मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की संरचना में बदलाव को देखने के लिठइमेजिंग तकनीक (fMRI or EEG) की मदद ली जाती रही थी, लेकिन इस सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¡ के जरिठसीधे-सीधे मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में बदलाव को देखा गया. शोध में शामिल मरीज वो थे, जो इपिलेपà¥à¤¸à¥€ (epilepsy) के इलाज के लिठà¤à¤°à¥à¤¤à¥€ थे और कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤•ल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट के लिठजिनके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में पहले ही इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¡ इंपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट किठहà¥à¤ थे. बेहद गंà¤à¥€à¤° रूप से बीमार इन मरीजों पर दवाà¤à¤‚ बेअसर हो चà¥à¤•ी थीं और ये सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का इंतजार कर रहे थे.
सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤¡ के जरिठसीधे-सीधे मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में बदलाव को देखा गया
इस शोध में पाया गया कि गहरी लंबी सांस लेने पर गंà¤à¥€à¤° रूप से बीमार इन मरीजों के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• का हर हिसà¥à¤¸à¤¾ सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ हो जाता है और इससे इलाज में à¤à¥€ काफी मदद मिलती है.
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